नेपाल में Gen-Z अब आपस में भिड़े, आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर मारपीट, जेल से भाग रहे कैदियों पर फायरिंग

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 नेपाल इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. जेन Z आंदोलन के नाम से शुरू हुए विरोध ने सरकार गिरा दी. राजधानी काठमांडू से लेकर पश्चिमी नेपाल तक हिंसा की आग फैली हुई है. संसद, राष्ट्रपति भवन, नेताओं के घर और सरकारी दफ्तरों पर पत्थरबाजी व आगजनी के निशान हैं. हालांकि स्थिति शांत होती दिख रही है. काठमांडू में संकट के बीच भारत की एयरलाइन इंडिगो ने यात्रियों को राहत दी है. कंपनी ने कहा कि 11 सितंबर से काठमांडू के लिए रोजाना चार फ्लाइट फिर से शुरू होंगी. इसके अलावा, रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर दो स्पेशल रिलीफ फ्लाइट भी चलाई जाएंगी, ताकि फंसे यात्रियों को सुरक्षित घर लाया जा सके. इन फ्लाइट्स के किराए भी कम रखे जाएंगे. इंडिगो ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और उनके अपने लोगों से मिलने की चिंता हमारी प्राथमिकता है.

सोमवार को संसद भवन के बाहर पुलिस फायरिंग में 19 युवाओं की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए. मंगलवार को कोटेश्वर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने तीन पुलिसकर्मियों को मार डाला. कालीमाटी थाने के पास हुई झड़प में तीन और प्रदर्शनकारी मारे गए. दो दिनों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 600 से अधिक घायल हैं. हालात इतने बेकाबू हुए कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन उनके जाने के बाद भी गुस्सा शांत नहीं हुआ. मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद और राष्ट्रपति कार्यालय को आग के हवाले कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में भी आगजनी हुई, जिसके बाद सभी सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई.

जेलों में भी बगावत, 13,500 कैदी फरार

अराजकता का फायदा उठाकर देशभर की जेलों से 13,500 से ज्यादा कैदी भाग निकले. बांके जिले के नौबस्ता बाल सुधार गृह में झड़प में पांच नाबालिग कैदियों की मौत हो गई. सिंधुलीगढ़ जेल से 471 कैदी, जिनमें 43 महिलाएं शामिल थीं, फरार हो गए. कई जेलों में आगजनी और हथियार लूटने की घटनाएं भी हुईं. इस कारण भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. 

सेना ने कमान संभाली, नया अंतरिम नेता चुना गया

स्थिति संभालने के लिए नेपाल आर्मी ने देशव्यापी कर्फ्यू और धारा 144 लागू कर दी है. त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा, जिससे सैकड़ों विदेशी यात्री फंस गए. हालांकि बुधवार शाम छह बजे से उड़ानें फिर से शुरू कर दी गईं. इसी बीच, Gen-Z आंदोलन के नेताओं ने चार घंटे चली ऑनलाइन मीटिंग में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम नेता चुन लिया. उनकी साफ-सुथरी छवि और राजनीतिक दलों से दूरी उन्हें युवाओं की पहली पसंद बना रही है.