बांग्लादेश में पानी में गए भारत के करोड़ों रुपए, 960 करोड़ का प्रोजेक्ट रद्द, जाते-जाते कांड कर गए यूनुस

4

ढाका: बांग्लादेश के लिए यूनुस अभिशाप बनकर सत्ता में आए हैं. वो जब से अंतरिम सरकार की कुर्सी पर बैठे हैं, तब से यहां खूनी कट्टरपंथियों को छूट मिल गई है. इस देश में हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं और ये देश पाकिस्तान के आतंकवादी मिशन के डर्टी वर्क का अड्डा बन चुका है. जबसे चुनावों का ऐलान हुआ है, तब से तय हो गया है कि यूनुस कुर्सी खाली कर देंगे लेकिन जाते-जाते वो भारत के साथ दुश्मनी निकालना नहीं भूले हैं. उन्होंने भारत का 960 करोड़ का बड़ा प्रजोक्ट कचरे के डब्बे में डाल दिया है. इस प्रोजेक्ट के लिए खर्च हुए भारत के करोड़ों रुपए पानी में चले गए हैं.

Indian Economic Zone के खिलाफ यूनुस की साजिश

शेख हसीना के दौर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर कैंची चलाई जा रही है. बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चटगांव के मीरसराय में प्रस्तावित ‘इंडियन इकोनॉमिक जोन’ (Indian Economic Zone) को पूरी तरह रद्द करने का ऐलान कर दिया है. जिस जमीन पर भारतीय कंपनियां फैक्ट्रियां लगाने वाली थीं, अब वहां टैंक के गोले और बारूद बनेंगे.
सोमवार को ढाका के तेजगांव में हुई बांग्लादेश आर्थिक क्षेत्र प्राधिकरण गवर्निंग बोर्ड यानी BEZA की बैठक में भारत को किनारे कर दिया गया. BEZA के कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी आशिक महमूद बिन हारून ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि अब उस विशाल जमीन पर भारत का आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक ‘रक्षा औद्योगिक पार्क’ बनेगा. यानी जहां आर्थिक समृद्धि की बात होनी थी, अब वहां युद्ध की तैयारी होगी.’

Bangladesh का घटिया तर्क

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो तर्क दिया गया, वो और भी चौंकाने वाला है. चौधरी आशिक महमूद ने दुनिया भर में चल रहे युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा, ‘कभी-कभी जंग जीतने के लिए आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत नहीं होती, बल्कि गोला-बारूद और टैंक के धुरों जैसे बुनियादी उपकरणों की कमी भारी पड़ जाती है’. बांग्लादेश का मानना है कि उन्हें अब विदेशी कंपनियों के निवेश से ज्यादा जरूरत अपने घर में हथियार और गोला-बारूद बनाने की है.