देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए शक्तिशाली धमाके के पीछे किन शक्तियों का हाथ है, उसकी तह तक जाने की कोशिश लगातार जारी है. कार ब्लास्ट मामले में अभी तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में डॉक्रों की संलिप्तता ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को और भी बढ़ा दिया है. डॉक्टर शाहीन से लेकर डॉक्टर उमर नबी तक के बारे में लगातार नई बातें सामने आ रही हैं. छापेमारी और धर-पकड़ का सिलसिला लगातार जारी है. इस बीच, आमलोगों को राहत देने वाली एक खबर सामने आई है. लाल किला मेट्रो स्टेशन के सभी गेट रविवार को आमलोगों के लिए खोल दिए गए हैं.
दिल्ली कार ब्लास्ट मामले में एक और नया खुलासा हुआ है. जांच के दौरान घटनास्थल पर तीन कारतूस पाए गए, जिनमें दो जिंदा कारतूस और एक खाली खोखा है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि विस्फोट स्थल से बरामद 9 मिमी कैलिबर के तीन कारतूस मिले, जो आम नागरिकों के लिए प्रतिबंधित है. इसे कोई भी आम नागरिक अपनी लाइसेंसी बंदूक में इस्तेमाल नहीं कर सकता. ये कारतूस आमतौर पर फोर्सेज या स्पेशल परमिशन वाले लोगों के पास होते हैं. सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि मौके से कोई पिस्तौल या उसका कोई पार्ट नहीं मिला है. यानी गोली के कारतूस तो मिले, पर उन्हें चलाने वाला हथियार वहां मौजूद नहीं था.
पुलिस के सामने नई चुनौती
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि कारतूस मिलने के बाद मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ के कारतूस चेक कराए गए, लेकिन उनका कोई कारतूस मिसिंग नहीं था, जिससे इस संभावना को खारिज कर दिया गया कि ये कारतूस ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के थे. इस स्थिति में पुलिस के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. पुलिस ये पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार ये कारतूस यहां कैसे आए. इससे पहले, हरियाणा के नूंह से नए विवरण सामने आए, जहां विस्फोट में मारे गए आतंकी उमर मुहम्मद को विस्फोट से पहले कई घंटों तक घूमते देखा गया. जांच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी उमर ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक इलेक्ट्रीशियन शोएब की मदद से 10 दिनों के लिए एक कमरा किराए पर लिया था.












