इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता को लेकर माहौल पूरी तरह हाई अलर्ट पर है. दो हफ्ते के नाजुक सीजफायर के बाद शुरू हो रही इस बातचीत को क्षेत्र के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है. पाकिस्तान की राजधानी को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है और इसे एक तरह से डिप्लोमैटिक किले में तब्दील कर दिया गया है. इस बीच ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है. संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालिबाफ के नेतृत्व में आई टीम में विदेश मंत्री अब्बास अरागची, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियन और केंद्रीय बैंक गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने उनका स्वागत किया.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति भी पहुंच रहे
वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुका है. रवाना होने से पहले वेंस ने साफ कहा कि अगर ईरान ने बातचीत में चाल चलने की कोशिश की तो अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान ईमानदारी दिखाएगा.
बातचीत से पहले क्या बोले ट्रंप?
बातचीत से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह वार्ता बराबरी की नहीं है और ईरान के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान इसी के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.
पाकिस्तान में क्या तैयारी हुईं
पाकिस्तान ने इस पूरी वार्ता को लेकर असाधारण तैयारी की है. इस्लामाबाद में छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं. रेड जोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है और सेरेना होटल को खाली कराकर सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है. पूरे शहर में सुरक्षा बल तैनात हैं और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस वार्ता की सफलता के लिए दुआ करें. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने संभावित बड़े युद्ध को रोकने में भूमिका निभाई है और अब शांति की दिशा में यह एक बड़ा कदम है.
लेबनान और इजरायल में होगी मीटिंग
इस बीच एक और अहम घटनाक्रम में लेबनान और इजराइल के बीच भी बातचीत की तैयारी शुरू हो गई है. दोनों देशों के बीच अगले हफ्ते वॉशिंगटन में बैठक हो सकती है, हालांकि लेबनान ने साफ किया है कि वह तभी बातचीत करेगा जब पहले युद्धविराम लागू होगा. फिलहाल हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं तो दूसरी तरफ बयानबाजी और अविश्वास भी कायम है. ऐसे में इस्लामाबाद की यह वार्ता सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी बन गई है.












