कौन हैं वो 4 सीटें, जिन पर NDA में फंसा पेच, चिराग की किन 3 सीटों से नीतीश हैं नाराज?

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बिहार चुनाव में दोनों चरण के लिए नामांकन शुरू हो गया है. पहले चरण के नामांकन के लिए मात्र तीन दिन बचे हैं. इधर NDA और महागठबंधन में शीट शेयरिंग में पेच फंसा हुआ है. केवल महागठबंधन ही नहीं, अब एनडीए में भी सीटों को लेकर पेच फंसा है. सूत्रों का दावा है कि कुछ सीटों को लेकर सीट शेयरिंग से नीतीश कुमार सहमत नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि एनडीए के भीतर बिहार की कुल चार विधानसभा सीटों पर पेच फंसा हुआ है. इनमें वो चार सीटें हैं- तारापुर, सोनबरसा, राजगीर और मोरवा.

दरअल, बिहार में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे सम्राट चौधरी की सीट तारापुर पर भी पेच फंसा है. बीजेपी यहां से सम्राट चौधरी को उतरने की तैयारी कर चुकी है, मगर नीतीश कुमारा तारापुर जदयू खाते में रखना चाहते हैं. भाजपा नीतीश की इस नाराजगी को समझ चुकी है. इसलिए नीतीश की आपत्ति के बाद अब सम्राट चौधरी के लिए भाजपा प्लान B के रूप में पटना की कुम्हरार या पटना साहिब पर विचार कर रही है.
क्या है एनडीए सीट शेयरिंग फॉर्मूला
दरअसल, एनडीए ने रविवार को सीट बंटवारे की घोषणा की थी. सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें, चिराग पासवान की एलजेपी (आरवी) को 29, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम और जीतन राम मांझी की एचएएम को 6-6 सीटें मिली हैं. हालांकि, अब स्पेसिफिक सीटों पर खींचतान जारी है. सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार इस बंटवारे से पूरी तरह सहमत नहीं हैं और कुछ सीटों की अदला-बदली की मांग कर रहे हैं.
मांझी-कुशवाहा भी नाराज
सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार इन सीटों पर अपनी पार्टी की मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहते हैं, जहां पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन रहा था. राजगीर और मोरवा भी जेडीयू की पारंपरिक सीटें हैं, जहां स्थानीय नेता असंतोष जता रहे हैं. उधर छोटे सहयोगी जैसे जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी कम सीटों से नाराज हैं और उन्होंने असंतोष जताया है. हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया है.