मुंबई में सबकी निगाहें बीईएसटी (BEST) कर्मचारियों की सहकारी क्रेडिट सोसायटी चुनाव के रिजल्ट पर टिकी है. सोमवार को 83.69% की रिकॉर्ड वोटिंग के साथ यह चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें कुल 15,123 सदस्यों में से 12,656 ने मतदान किया. अब सबकी निगाहें वोटों पर गिनती पर हैं.
यह चुनाव इसलिए खास है, क्योंकि इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसे पहली बार गठबंधन करके मैदान में उतरे हैं. दोनों दलों ने मिलकर ‘उत्कर्ष पैनल’ के तहत 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं… 18 शिवसेना (यूबीटी) से, 2 मनसे से और 1 अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ से. उनका मुकाबला बीजेपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट समर्थित ‘सहकार समृद्धि पैनल’ से है.
वोट खरीदने के आरोप
इस चुनाव की अहमियत इस तरह भी समझ सकते हैं कि वोट वाले दिन भी यहां खूब गहमागहमी दिखी. मनसे नेता संदीप देशपांडे ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित सहकार समृद्धि पैनल वोटरों को लुभाने के लिए कैश बांट रहा है. उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकर्ता दत्तात्रय पेडनेकर को एक पैम्फलेट के साथ लिफाफे में दो-दो 500 रुपये के नोट मिले. वहीं देशपांडे ने कहा, ‘यह चुनाव को भ्रष्ट करने की कोशिश है. हम इसकी शिकायत चुनाव अधिकारी से करेंगे.’
भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. लाड इस सहकार समृद्धि पैनल की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ये आरोप केवल हार से बचने के बहाने हैं. भाजपा और महायुति गठबंधन लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ रहा है.’
इतने छोटे चुनाव पर इतना जोर क्या?
बीईएसटी क्रेडिट सोसायटी चुनाव केवल कर्मचारी राजनीति तक सीमित नहीं है. इसके सदस्य मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली बस और बिजली सेवा से जुड़े हैं. सोसायटी के माध्यम से जुड़ा प्रभाव महानगर की राजनीति और निगम स्तर की सियासत तक फैला हुआ है. यही कारण है कि राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकतें इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही हैं.
अब जबकि मतदान रिकॉर्ड स्तर पर हो चुका है, सभी की नजरें मंगलवार को आने वाले नतीजों पर हैं. क्या उद्धव-राज का गठबंधन पहली परीक्षा में सफल होगा या भाजपा-शिंदे समर्थित महायुति पैनल अपनी पकड़ बनाए रखेगा? इसका फैसला बीईएसटी कर्मचारियों की वोट पेटियों में बंद हो चुका है.












