देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वालों की गाथा कभी भुलाई नहीं जाती. सारण जिले के दरियापुर प्रखंड के शर्मा टोला का लाल छोटू शर्मा आतंकवादियों से लड़ते हुए श्रीनगर में शहीद हो गया. गांव के इस बेटे ने बचपन से ही सेना में जाने और देश सेवा का सपना देखा था.
छोटू शर्मा 2017 में इंडियन आर्मी में भर्ती हुए थे. परिवार ने हाल ही में उनकी शादी धूमधाम से की थी. इसी साल 5 मई को वे दुल्हनिया लेकर घर आए थे. लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. शादी के महज 10 दिन बाद ही ड्यूटी पर बुला लिया गया और छोटू देश की रक्षा के लिए श्रीनगर पहुंच गए. शनिवार को जब मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से उनकी शहादत की खबर गांव पहुंची तो हर कोई स्तब्ध रह गया. घर में कोहराम मच गया, मां-बाप और भाईयों की चीख-पुकार ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया.
गांव में गूंजे “भारत माता की जय” के नारे
जब छोटू का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो उठी. पूरा इलाका भारत माता की जय और छोटू शर्मा अमर रहें के नारों से गूंज उठा. सेना के जवानों ने राष्ट्रीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी. छोटू को दिघवारा पिपरा गंगा घाट पर पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई.
जब छोटू का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो उठी. पूरा इलाका भारत माता की जय और छोटू शर्मा अमर रहें के नारों से गूंज उठा. सेना के जवानों ने राष्ट्रीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी. छोटू को दिघवारा पिपरा गंगा घाट पर पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई.
परिवार और दोस्तों की आंखों में आंसू, दिल में गर्व
बड़े भाई राजेश कुमार ने रोते हुए कहा, “छोटू हमारे घर का सबसे छोटा था. हमने उसे बच्चों की तरह पाला था. आज भाई का प्यार और स्नेह हमें झकझोर कर चला गया.” उनके दोस्त अंबुज कुमार ने भी नम आंखों से यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि छोटू बचपन से ही बेहद मिलनसार थे और उनमें देश सेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा था. हाल ही में फोन पर उन्होंने दुर्गा पूजा में आने और धूमधाम से त्योहार मनाने की बात कही थी. अंबुज ने कहा, “आज भले ही छोटू हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हमें गर्व है कि वे मां भारती की सेवा करते हुए अमर हो गए. उन्हें हमेशा याद किया जाएगा.”
बड़े भाई राजेश कुमार ने रोते हुए कहा, “छोटू हमारे घर का सबसे छोटा था. हमने उसे बच्चों की तरह पाला था. आज भाई का प्यार और स्नेह हमें झकझोर कर चला गया.” उनके दोस्त अंबुज कुमार ने भी नम आंखों से यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि छोटू बचपन से ही बेहद मिलनसार थे और उनमें देश सेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा था. हाल ही में फोन पर उन्होंने दुर्गा पूजा में आने और धूमधाम से त्योहार मनाने की बात कही थी. अंबुज ने कहा, “आज भले ही छोटू हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हमें गर्व है कि वे मां भारती की सेवा करते हुए अमर हो गए. उन्हें हमेशा याद किया जाएगा.”
गांव का गौरव
चार भाइयों में सबसे छोटे छोटू शर्मा ने अपने साहस और बलिदान से पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. आज भले ही उनके घर में मातम पसरा है, लेकिन उनकी शहादत की गूंज हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी.
चार भाइयों में सबसे छोटे छोटू शर्मा ने अपने साहस और बलिदान से पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. आज भले ही उनके घर में मातम पसरा है, लेकिन उनकी शहादत की गूंज हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी.












