70 % नमी, सुबह में गर्मी, शाम में तूफान! अगर दिखे ये 3 संकेत… तो समझे पहाड़ों में फटेगा बादल

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बारिश का मौसम आते ही अक्सर लोग काले बादलों को देखते ही बरसात का अंदाज़ा लगा लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये बादल जो बारिश लाते हैं कभी-कभी तबाही का कारण भी बन सकते हैं? खासकर पहाड़ी इलाकों में क्लाउड बर्स्ट यानी बादल फटने की घटनाएं अक्सर सुनने को मिलती हैं, जो भारी तबाही मचाती हैं. नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिकों ने इस प्राकृतिक घटना के पीछे का विज्ञान समझाया है. 

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जब बादल भारी मात्रा में आर्द्रता लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई बाधा आती है, तब वे अचानक फट पड़ते हैं. इस स्थिति में संघनन तेजी से होता है, जिससे एक सीमित क्षेत्र में लाखों लीटर पानी एक साथ गिरता है, जिसके परिणामस्वरूप तेज बहाव वाली बाढ़ आती है. इस बाढ़ के कारण पहाड़ी में भूस्खलन तेजी से होता है जो तबाही का कारण बनाता है.
क्या होता है क्लाउड बर्स्ट?
एरीज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह बताते हैं कि जब वातावरण में नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है और हवा के ऊपरी हिस्से में तेजी से ठंडक होती है, तो पानी की बूंदें एक जगह इकट्ठी होकर भारी मात्रा में वर्षा के रूप में गिरती हैं. और उस समय बारिश की रफ्तार 100 मिमी प्रति घंटा होती है, यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि कम समय में अत्यधिक पानी जमीन पर गिरता है, जिसे क्लाउड बर्स्ट कहा जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में यह खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि वहां पहाड़ अत्यधिक ऊंचे होते हैं और बादल ज़मीन के नज़दीक होने के कारण उधर उधर फैल नहीं पाते और एक ही जगह पर रहते हैं, जो  इस प्रक्रिया को और तेज कर देती हैं.