8 फीसदी विकास दर हासिल कर सकता है भारत, बस करना होगा एक काम, डिप्‍टी गवर्नर ने बता दिया तेज ग्रोथ का रास्‍ता

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नई दिल्‍ली. हाल में जारी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की विकास दर के आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. टैरिफ वॉर और चीन के जरूरी केमिकल का निर्यात रोके जाने से लगा था कि भारत की विकास दर सुस्‍त पड़ जाएगी, लेकिन चालू वित्‍तवर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के आंकड़ों ने सभी को स्‍तब्‍ध कर दिया. इस दौरान भारत की विकास दर 7.8 फीसदी पहुंच गई. अब रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्‍टी गवर्नर माइकल डी पात्रा ने 8 फीसदी विकास दर का रास्‍ता बताया है और कहा है कि इस लक्ष्‍य तक पहुंचना भारत के लिए कोई कठिन काम नहीं है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गवर्नर माइकल डी पात्रा ने कहा कि भारतीय कॉरपोरेट जगत पर्याप्त निवेश नहीं कर रहा है, जिसकी वजह से देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8 प्रतिशत से ऊपर नहीं जा पा रहा है. पात्रा ने कहा, ‘अब हम फिर से 8 प्रतिशत वृद्धि की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें भारतीय कंपनियां पर्याप्त निवेश नहीं कर रही हैं. अगर प्राइवेट कंपनियों का निवेश बढ़े तो भारत के लिए 8 फीसदी की विकास हासिल करना मुश्किल काम नहीं होगा.
पिछले साल सुस्‍त पड़ गई थी रफ्तार
उन्होंने कहा कि वित्तवर्ष 2024-25 में जीडीपी में एक चक्रीय गिरावट देखे जाने से वृद्धि दर 6.5 फीसदी पर आ गई थी, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर इस दिशा में उम्मीद बढ़ाती है. पात्रा ने कहा कि निवेश नहीं होने का बड़ा कारण मांग को लेकर स्पष्टता की कमी है. जब कंपनियों को राजस्व वृद्धि का भरोसा नहीं होता है तो वे पूंजी निवेश से कतराती हैं.