छांगुर बाबा के वो 5 राजदार, जिन्हें ED-ATS भी नहीं ढूंढ पा रही… आखिर तेज तर्रार अफसरों को कौन उलझा रहा?

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मामले में चर्चित छांगुर बाबा सिंडिकेट से जुड़े पांच आरोपी अब भी यूपी एटीएस की गिरफ्त से बाहर हैं. जबकि 16 नवंबर 2024 को लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज एफआईआर में इनका नाम स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है. एफआईआर के अनुसार, इस मामले में कुल नौ लोग नामजद हैं, जिनमें से चार- जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, उसका बेटा महबूब, नीतू उर्फ नसरीन और नवीन उर्फ जमालुद्दीन को एटीएस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

कस्टडी में गोलमोल जवाब
कस्टडी रिमांड में लिए गए मुख्य आरोपी छांगुर बाबा और नीतू उर्फ नसरीन एजेंसियों को स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं. दोनों आरोपी टालमटोल जवाब देकर जांच में बाधा पहुंचा रहे हैं, जिससे अन्य आरोपियों तक पहुंचने में देरी हो रही है. इससे एटीएस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.

अब भी फरार हैं 5 आरोपी
एफआईआर में दर्ज पांच अन्य आरोपी मोहम्मद सबरोज, रशीद, शहाबुद्दीन, रमजान और नागपुर निवासी ईदुल इस्लाम अब भी फरार हैं. इन पर आरोप है कि इन्होंने संगठित रूप से वर्षों से धर्मांतरण का रैकेट चलाया. विशेष रूप से ईदुल इस्लाम, जो खुद को भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ का राष्ट्रीय महासचिव बताता है, महाराष्ट्र में इस सिंडिकेट का अहम चेहरा माना जा रहा है.

पुलिस प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप
आम लोगों में यह चर्चा भी तेज है कि आखिर छांगुर बाबा 15 वर्षों तक पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे यह सिंडिकेट कैसे चलाता रहा. देवगांव (आजमगढ़) में भी इन आरोपियों पर धर्मांतरण के मामले दर्ज हैं. फिर भी उन्हें अब तक गिरफ्तार न किया जाना प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है.

सीएम योगी ने दी थी सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस मामले को गंभीर मानते हुए सख्त कार्रवाई की बात कह चुके हैं. लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी से सरकार की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.