‘ऑपरेशन सिंदूर बेकार लगता है’, पहलगाम हमले में पिता-भाई को खोने वाले सावन बोले- पाकिस्तान से संबंध नहीं रखना चाहिए

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पहलगाम अटैक के बाद भारत और पाकिस्‍तान के पहले से खराब संबंध और भी खराब हो चुके हैं. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर पाकिस्‍तान को इस हमले का करारा जवाब भी दिया है. भारत ने पाकिस्‍तान के साथ रही-सही संबंध को भी खत्‍म कर दिया. ऐसे में दोनों देशों के बीच क्रिकेट मैच को लेकर सियासत गरमा गई है. विपक्षी दलों के नेताओं और पूर्व क्रिकेटर्स के बाद अब पहलगाम हमले के पीड़ितों के परिवार ने भी भारत-पाक मैच को लेकर सख्‍त ऐतराज जताया है. टेरर अटैक में मारे गए लोगों के परिजनों ने कहा कि अब तो ऑपरेशन सिंदूर भी बेकार लगता है.

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच का कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि इस मुकाबले का आयोजन पीड़ित परिवारों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. परिजनों ने सवाल उठाया कि जब तक ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं हुआ है, तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का खेल या संबंध क्यों रखा जाए. गुजरात के भावनगर के सावन परमार ने भी इस आतंकी हमले में आपनों को खोया. आतंकवादियों ने उनके पिता और 16 साल के भाई की भी हत्‍या कर दी थी. सावन ने कहा, ‘जब हमें पता चला कि भारत और पाकिस्तान का मैच हो रहा है, तो हम बहुत डिस्‍टर्ब हो गए. पाकिस्तान से कोई भी रिश्ता नहीं रहना चाहिए. अगर मैच खेलना है तो पहले मेरा भाई लौटा दो, जिसे गोलियों से छलनी कर दिया गया था. ऑपरेशन सिंदूर अब बेकार सा लग रहा है.’

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सावन की मां किरण यतीश परमार ने भी सीधे सवाल किए हैं. उन्होंने कहा, ‘यह मैच नहीं होना चाहिए. मैं पूछना चाहती हूं कि जब ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं हुआ तो भारत-पाकिस्तान मैच क्यों आयोजित किया जा रहा है? देश के लोगों से भी अपील है कि वे उन परिवारों से मिलें जिन्होंने पहलगाम हमले में अपनों को खोया है और देखें कि उनके ज़ख्म आज भी ताज़ा हैं.’ बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने लंबी अवधि के लिए सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई को लेकर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी.
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबले को लेकर भावनाएं बंटी हुई हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों की नाराज़गी ने इस बहस को और तेज कर दिया है. उनका कहना है कि आतंकवाद से पीड़ित परिवारों की तकलीफ को नज़रअंदाज़ कर कोई भी खेल आयोजन स्वीकार्य नहीं है. उधर, पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता केदार जाधव ने भी इस मैच का विरोध किया. उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले भी कहा है कि यह मैच नहीं खेला जाना चाहिए. मेरे हिसाब से भारत को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में नहीं उतरना चाहिए.’ जहां एक ओर क्रिकेट प्रशंसक खेल को खेल की भावना से देखने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आतंक प्रभावित परिवारों और कई राजनीतिक आवाजें सरकार पर दबाव बना रही हैं कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का खेल संबंध पुनर्विचार किया जाना चाहिए.