चीन ने सोमवार को कहा कि दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) और उनसे जुड़ी प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने तथा इनके दुरुपयोग के लिए विदेशी कंपनियों को जिम्मेदार ठहराने के उसके कदम का पाकिस्तानी नेताओं द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन कीमती धातुओं को भेंट किए जाने से कोई संबंध नहीं है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित होने के बावजूद पाकिस्तान के साथ चीन की अटूट दोस्ती बरकरार है. लिन ने सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के संवाददाता की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “दुर्लभ खनिजों और संबंधित वस्तुओं के संबंध में निर्यात नियंत्रण उपायों पर चीन की हालिया घोषणा का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है.”
उन्होंने कहा, “आपने जिन खबरों का ज़िक्र किया है, वे या तो तथ्यों से अनजान हैं या अटकलों पर आधारित हैं या फिर मतभेद पैदा करने के इरादे से गढ़ी गई हैं. ये खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं.” दुर्लभ खनिजों के खनन-प्रसंस्करण पर वस्तुत: एकाधिकार रखने वाले चीन ने पिछले हफ्ते इन खनिजों के खनन एवं प्रसंस्करण पर नये निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की और अज्ञात विदेशी कंपनियों पर सैन्य उद्देश्यों के लिए उसके खनिजों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
ट्रंप ने बीजिंग के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए चीनी वस्तुओं के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी. हाल ही में एक तस्वीर सामने आई, जिसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ ट्रंप को एक बॉक्स भेंट करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसमें दुर्लभ खनिज के नमूने मौजूद थे.
हालांकि, लिन ने कहा कि जनरल मुनीर ने ट्रंप को जो बॉक्स भेंट किया था, उसमें दुर्लभ खनिज नहीं, बल्कि रत्न अयस्क था. चीनी प्रवक्ता ने कहा, “मुझे जो पता चला है, उसके अनुसार पाकिस्तान-अमेरिका खनन सहयोग पर बातचीत कर रहे हैं. पाकिस्तान ने भरोसा दिलाया है कि अमेरिका के साथ उसके व्यापार से चीन के हितों या चीन के साथ उसके सहयोग को नुकसान नहीं पहुंचेगा.”












