पाकिस्तान हमेशा चीन के साथ दोस्ती को समुद्र से गहरी और हिमालय से ऊंची बताता था. लेकिन जब से पाकिस्तान अमेरिका के करीब जाने लगा है, वह चीन को भाव देना बंद कर रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) और चीनी कंपनियों के बीच विवाद सामने आया है. इसमें बहस इस हद तक पहुंच गई कि FBR ने चीनी कंपनियों को साफ कह दिया कि अगर उनका तरीका पसंद न आए तो वह पाकिस्तान में अपना काम बंद कर दें. दरअसल यह पूरा विवाद चीन की चार टाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों में लगे इलेक्ट्रॉनिक कैमरों से जुड़ा था.
FBR ने साफ कह दिया कि वह इन फैक्ट्रियों से मॉनिटरिंग कैमरा नहीं हटाने वाला. यह मामला संसद की सीनेट स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस एंड रेवेन्यू की बैठक में उठा, जिसकी अध्यक्षता सांसद सलीम मण्डवीवाला कर रहे थे. FBR के चेयरमैन राशिद महमूद लैंगरियल ने कमेटी के सामने बताया कि सिर्फ टाइल सेक्टर में ही लगभग 30 अरब पाकिस्तानी रुपये की टैक्स चोरी का शक है. उन्होंने कहा कि फैक्ट्री में कितना उत्पादन हो रहा है, इसकी निगरानी के लिए कैमरे जरूरी हैं और इन्हें हटाने का कोई सवाल नहीं बनता.
कंपनियों ने क्या कहा?
चेयरमैन लैंगरियल ने बताया कि सबसे पहले ये कैमरे पाकिस्तान के अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले चीनी उद्योग में लगाए गए थे, जहां लगभग 76 अरब रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई. इसके बाद सीमेंट उद्योग की मॉनिटरिंग में लगभग 102 अरब रुपये का नुकसान सामने आया. टाइल सेक्टर में यह आंकड़ा 30 अरब रुपये तक पहुंच गया. चीनी कंपनियों और एक पाकिस्तानी निवेशक के प्रतिनिधियों ने कमेटी में दावा किया कि फैक्ट्रियों में लगाए गए 15 कैमरे उनके प्रोडक्शन प्रोसेस की गोपनीयता को प्रभावित करते हैं. उनका कहना था कि यह व्यापारिक रहस्यों का उल्लंघन है और कंपनियों को नुकसान पहुंचा सकता है.
चीनी कंपनियों को पाक की चुनौती
लैंगरियल ने साफ किया कि यह मुद्दा पहले ही हल किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि 15 कैमरों में से 11 हटाए जा चुके हैं और अब सिर्फ चार कैमरे रखे गए हैं, जिनका काम केवल उत्पादन की गिनती करना है. उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स चोरी रोकना सरकार की प्राथमिकता है और कैमरे हटाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने कमेटी से कहा, ‘यदि कोई कंपनी मॉनिटरिंग से असहज है, तो वह उत्पादन बंद कर सकती है. लेकिन कैमरे हटाए नहीं जाएंगे.’












