तिरुपति बालाजी के प्रसाद में चर्बी के बाद बैद्यनाथ धाम के स्वादिष्ट पेड़े में मिट्टी, देवघर के 72 दुकानों के सैंपल में मिलावटखोरी

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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दो दिनों के लिए बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर पहुंच रहे हैं. भोले बाबा की नगरी का श्रावणी मेला दुनिया भर में प्रसिद्ध है. जेपी नड्डा इस दौरे के दौरान भगवान भोले नाथ के दर्शन करने भी पहुंचेंगे. इसके साथ ही यहां पूरे साल प्रसाद के रूप में मिलने वाला चूड़ा और पेड़ा भी अपने खास स्वाद से भक्तों को आकर्षित करता रहा है. लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कलेक्ट किए गए सैंपल में इन स्वादिष्ट पेड़े में भारी मात्रा में मिलावटखोरी का खुलासा हुआ है. तिरुपति बाजाली के प्रसाद में पशु की चर्बी और मछली का तेल मिलाए जाने की पुष्टि होने के बाद देवघर में मुनाफा कमाने के लिए पेड़ा प्रसाद में मिट्टी मिलाने का खुलासा हुआ है.

देवघर के पेड़े में भारी मिलावटखोरी

पवित्र बाबा बैद्यनाथ धाम यानी देवघर में आयोजित राजकीय श्रावणी मेले के दौरान बेचे गए पारंपरिक प्रसाद ‘पेड़ा’ में बड़े पैमाने पर मिलावट की पुष्टि हुई है. लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.

पेड़ा में मिलाई जाती है मिट्टी

मेले के दौरान पेड़े की डिमांड काफी बढ़ जाती है. बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाकर मुनाफाखोर नकली मावा या खोवा और घटिया सामग्री से पेड़ा तैयार कर महंगे दामों पर बेचे जाने की शिकायतें थीं. इसे रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने लगभग छह दर्जन (72) दुकानों से पेड़े के नमूने जब्त किए थे. रांची स्थित लैब में इन नमूनों की जांच की गई, जिसमें पाया गया-:
  • पेड़ा के कई सैंपलों में मिट्टी की मिलावट की गई थी.
  • पेड़े बनाने में सिंथेटिक (नकली) खोवा का उपयोग किया गया था.
    खाद्य सुरक्षा अधिकारी एस.के. सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर, विभाग अब मिलावट करने वाले दुकानदारों को नोटिस भेजने और उनके खिलाफ नियम संगत कानूनी कार्रवाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है.

    ईमानदार दुकानदारों ने जताई नाराजगी

    इस घटनाक्रम पर देवघर मंदिर के चार नंबर गेट के पास पेड़ा बेचने वाले कई दुकानदारों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. दुकानदार राधेश्याम केशरी, मदन गोप और मोहन कुमार ने मिलावट को अत्यंत निंदनीय बताते हुए ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि मिलावटी पेड़ा खाने से श्रद्धालुओं को पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.

    सक्रिय है मिलावटी खोवा का नेटवर्क

    जानकारों का मानना है कि हर साल श्रावणी मेले से पहले मिलावटी खोवा तैयार करने का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है. बिहार और उत्तर प्रदेश के बड़े कारोबारी पाउडर दूध और लोथ मंगवाकर मशीनों से कम लागत वाला खोवा तैयार करते हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में पेड़ा बनाने में होता है.
    खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सेहत और आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

    तिरुपति बाजाली मंदिर के प्रसाद में मिलावटखोरी का हुआ था खुलासा

    पिछले साल तिरुपति बाजाली मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मवेशियों की चर्बी और मछली का तेल प्रयोग किए जाने का खुलासा हुआ था. जांच में पता चला था कि मशहूर कंपनी कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) जो ‘नंदिनी’ नाम से घी बनाती है, उसी की तरफ से मंदिर को घी सप्लाई की जाती थी. जहां तक देवघर का सवाल है तो यहां किसी खास कंपनी की तरफ से खोवा की सप्लाई नहीं होती है. यहां प्रसाद बेचने वाले दुकानदान अपने स्तर पर दूध और खोवा का इंतजाम करते हैं.