ईरान का फाइटर जेट क्रैश, पायलट की मौत, ट्रंप ने दी अटैक की धमकी, खामेनेई ने भी किया पलटवार

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तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान को बड़ा झटका लगा है. पश्चिमी ईरान के हमदान में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान एक ईरानी फाइटर जेट क्रैश हो गया, जिसमें पायलट की मौत हो गई. ईरानी सरकारी मीडिया से जुड़ी प्रेस टीवी ने इस हादसे की पुष्टि की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पायलट का नाम मेहदी फिरोजमंद है. यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ईरान पर ‘लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक’ पर विचार कर रहा है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान को नई न्यूक्लियर डील के लिए मजबूर करने के मकसद से हो सकती है. शुरुआती हमले सीमित सैन्य या सरकारी ठिकानों पर किए जा सकते हैं.

ट्रंप ने हाल ही में कहा, ‘हम एक डील करेंगे या किसी न किसी तरह डील करेंगे,’ और संकेत दिया कि अगले 10 से 15 दिनों में स्थिति साफ हो सकती है. द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर रहा है. एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड R. फोर्ड और उसके युद्धपोत क्षेत्र में तैनात कर दिया है. मार्च के मध्य तक अमेरिकी सैन्य जमावड़ा पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है.

ईरान ने UN से क्या कहा?

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अगर उस पर सैन्य हमला हुआ तो वह क्षेत्र में मौजूद ‘शत्रु ताकत’ के ठिकानों को वैध लक्ष्य मानेगा. ईरान का कहना है कि कोई भी देश उसे ‘न्यूक्लियर एनरिचमेंट के अधिकार’ से वंचित नहीं कर सकता. ईरान ने दोहराया कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन नागरिक उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन उसका अधिकार है.
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि उनकी सेना अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबोने की क्षमता रखती है और अमेरिकन सेना को इतनी जोर से मार सकती है कि वह फिर उठ न सके. एक और संदेश में खामेनेई ने कहा, ‘बेशक, एक वॉरशिप मिलिटरी हार्डवेयर का एक खतरनाक हिस्सा है. लेकिन, उस वॉरशिप से भी ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो उस वॉरशिप को समुद्र की गहराई में भेज सकता है.’

बातचीत से नहीं निकल रहा कोई रास्ता

हालांकि जेनेवा में दोनों देशों के बीच हाल में बातचीत हुई है, लेकिन व्हाइट हाउस का कहना है कि अभी भी कई मुद्दों पर दोनों पक्ष ‘बहुत दूर’ हैं. 2015 की न्यूक्लियर डील से अमेरिका के हटने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया है. अब सवाल यह है कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त में हालात संभाल पाएगी या मिडिल ईस्ट एक और बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ रहा है.