दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले में पत्रकार की मौत, अमेरिका में मीटिंग से पहले बढ़ा तनाव

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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) सौंपना होगा. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि यह मांग बातचीत का ‘मुख्य हिस्सा’ है और अमेरिका अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपना चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास इस समय करीब 2000 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है. इसमें से लगभग 440 से 450 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक शुद्धता वाला है, जिसे आगे प्रोसेस करने पर हथियार स्तर तक पहुंचाया जा सकता है. इसके अलावा 20 प्रतिशत और उससे कम स्तर का यूरेनियम भी ईरान के पास मौजूद है.

अमेरिका और उसके सहयोगियों का कहना है कि यह जखीरा भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल हो सकता है. यही वजह है कि वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह छोड़ दे या सौंप दे. हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपने यूरेनियम भंडार को पूरी तरह छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. यह मांग 2015 के न्यूक्लियर समझौते (JCPOA) से अलग है. उस समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.67 प्रतिशत तक सीमित करने और स्टॉक को करीब 300 किलोग्राम तक रखने पर सहमति दी थी. लेकिन 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिका इस समझौते से बाहर हो गया, जिसके बाद ईरान ने भी धीरे-धीरे अपने प्रतिबंध हटा दिए और संवर्धन स्तर बढ़ा दिया.

अमेरिकी नेतृत्व में बड़ा बदलाव

वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के रक्षा तंत्र में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पेंटागन ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना के सेक्रेटरी जॉन फेलन ने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ दिया है. इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ईरान के साथ तनावपूर्ण स्थिति में है. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक बयान में कहा कि फेलन प्रशासन छोड़ रहे हैं और उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. हालांकि, उनके जाने की वजह को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है. फेलन की जगह अब नौसेना के अंडरसेक्रेटरी हंग काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी बनाया गया है.

ईरान को 500 मिलियन डॉलर का नुकसान

इस समय बातचीत ऐसे माहौल में हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी चरम पर है. एक तरफ सीजफायर लागू है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है. व्हाइट हाउस का कहना है कि सैन्य कार्रवाई फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है. लेविट ने कहा कि इस नाकेबंदी के कारण ईरान को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान सार्वजनिक रूप से कुछ और कहता है, लेकिन निजी बातचीत में उसका रुख अलग होता है.
इस बीच इस्लामाबाद में प्रस्तावित अगली वार्ता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी को सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए नई बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है.ते हैं.