ज‍िमखाना क्‍लब सरकार की प्रॉपर्टी, इसके खाली करना होगा… केंद्र ने शुरू क‍िया कब्‍जे में लेने का प्रॉसेस

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केंद्र सरकार ने दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन खाली कराने की प्रक‍िया शुरू कर दी है. सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के सामने अर्जी दी है. इसमें साफ कहा है क‍ि यह जमीन सार्वजनिक संपत्ति है और इसका मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है. इसे खाली करना होगा.

सरकार ने 1928 की स्थायी लीज (Perpetual Lease Deed) की धारा 4 का हवाला देते हुए कहा है कि यह जमीन अब ड‍िफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पब्‍ल‍िक सेफ्टी और अन्य सरकारी कामों के लिए जरूरी है. केंद्र के मुताबिक 22 मई को क्लब को लीज समाप्त करने और जमीन सरकार को वापस सौंपने का नोटिस दिया गया था. क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.
लीज खत्‍म, अवैध कब्‍जा हटाया जाए
सरकार का कहना है कि लीज खत्म होने के बाद भी क्लब का वहां बने रहना पब्लिक प्रिमाइसेस एक्‍ट 1971 के तहत अवैध कब्जा माना जाएगा. 20 मई एस्टेट ऑफिसर पहले भी जमीन खाली करने का आदेश दे चुके हैं. इसल‍िए तुरंत यह जमीन खाली कराई जाए और कब्‍जा क‍िए बैठे लोगों को वहां से हटाया जाए. केंद्र ने कहा है क‍ि शांतिपूर्वक यह जमीन सरकार को सौंपी जाए
स मामले में लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ‍िस (L&DO) ने क्लब को पब्लिक प्रिमाइसेस एक्‍ट की धारा 4(1) और 4(2)(b)(ii) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि जब लीज कानूनी रूप से खत्म कर दी गई और जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए सरकार ने वापस ले ली, तो उसके बाद क्लब का कब्जा कानून के मुताबिक अवैध माना जाएगा.
7 जुलाई तक का अल्‍टीमेटम
एस्टेट ऑफिसर ने क्लब से 7 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे तक जवाब देने को कहा है. साथ ही पूछा है क‍ि अब तक आपने खाली क्‍यों नहीं क‍िया, आपके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न जारी किया जाए. क्लब के प्रतिनिधियों या उनके वकील को इस समय व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष में सबूत पेश करने होंगे और पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देना होगा. नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि क्लब तय तारीख और समय पर पेश नहीं होता, तो एस्टेट ऑफिसर एकतरफा फैसला दे सकते हैं.
क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद?
केंद्र सरकार ने 113 साल पुराने प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज समाप्त कर दी है. सरकार ने लुटियंस दिल्ली में बने इस क्‍लब की 27.3 एकड़ की बेहद कीमती जमीन खाली करने को कहा है. इसके बाद मामला कानूनी और राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया.