शिंदे कैंप का ‘ऑपरेशन टाइगर’ अटका, स्‍पीकर को सौंपे लेटर पर नहीं थे इन दो सांसदों के साइन

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एकनाथ शिंदे कैंप का ऑपरेशन टाइगर अटका गया है, क्‍योंक‍ि उद्धव ठाकरे के दो सांसद संजय दीना पाटिल और ओम राजे निंबालकर के लेटर पर फ‍िलहाल साइन नहीं हैं. दोनों अपने बीजेपी क्षेत्र और 2029 के भविष्य को लेकर BJP से बात करना चाहते हैं.
उद्धव ठाकरे की श‍िवसेना के सांसद छीनने की कोश‍िश कर रहे एकनाथ शिंदे कैंप को थोड़ी मायूसी हाथ लगती द‍िख रही है. सूत्रों का कहना है क‍ि ऑपरेशन टाइगर अटक गया है, क्‍योंक‍ि स्‍पीकर को सौंपे लेटर पर सांसद संजय दीना पाटिल और ओम राजे निंबालकर के साइन नहीं हैं. चूंक‍ि संजय दीना पाटिल और ओम राजे निंबालकर दोनों के चुनाव क्षेत्र बीजेपी के हैं, इसलिए 2029 में उनका भविष्य खतरे में है. इसलिए, दोनों नेता BJP नेताओं से बात करना चाहते हैं. दूसरी ओर, BJP ने उन नेताओं से बातचीत शुरू कर दी है जो टूटने की कगार पर हैं.

इस बीच खबर आ रही क‍ि शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के सांसदों की किस्मत का फैसला कल होगा. शिवसेना UBT पार्टी की तरफ से जारी व्हिप के बाद सबका ध्यान इस बात पर है कि अगर ये MP शामिल नहीं होते हैं तो क्या एक्शन लिया जाएगा. इसके साथ ही, अभी भी चर्चा है कि अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत बागी सांसदों के संपर्क में हैं. सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़ने वाले कुछ चुने हुए सांसदों से भी बातचीत की.
उद्धव गुट के सांसद का जवाब पढ़‍िए
बगावत पर शिवसेना यूबीटी सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने कहा, मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता… मैंने बैठक में अपना रुख साफ कर दिया है कि मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं और हमेशा रहूंगा… सांसद अरविंद सावंत ने उलटे सवाल पूछ द‍िया. उन्‍होंने कहा क‍ि जिस व्यक्ति ने आपको बगावत की खबर दी है, उसके पास जाएं और सांसदों की ओम बिरला से मुलाकात का सबूत मांगें…मान लीजिए कि 4 सांसद पार्टी छोड़ देते हैं. इससे देश पर क्या असर पड़ता है? इससे लोगों को क्या नुकसान हो रहा है? रुपये की गिरती कीमत देश को प्रभावित कर रही है. इससे दुनिया में हमारी बदनामी हो रही है…
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल क्‍या बोले
उद्धव गुट में टूट पर जब केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल से पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ बीजेपी से संबंधित विषय नहीं है, इसलिए इसका जवाब पार्टी कार्यकर्ता नहीं दे सकते. इस मामले पर संबंधित लोगों से ही पूछना चाहिए. उनके पास (उद्धव गुट) अब कोई मजबूत मुद्दा नहीं बचा है. उनका एकमात्र एजेंडा सिर्फ बीजेपी पर बात करना रह गया है. वे अपने नुकसान (डैमेज) को कंट्रोल करने में लगे हैं और हर बात में बीजेपी को लाते हैं. अपना घर संभालना नहीं आता तो दूसरों को दोष देना सही नहीं है.